हिंदी साहित्य के प्रमुख कवि: एक परिचय
हिंदी साहित्य का इतिहास अत्यंत प्राचीन और समृद्ध है। इसमें अनेक महान कवियों ने अपनी लेखनी से समाज को नई दिशा दी है। यहाँ हम हिंदी के कुछ कालजयी कवियों और उनकी रचनाओं के बारे में जानेंगे।
1. कबीरदास (भक्तिकाल)
कबीरदास निर्गुण भक्ति धारा के प्रमुख कवि और समाज सुधारक थे। उन्होंने बाहरी आडंबरों का कड़ा विरोध किया।
- जीवन काल: 1398 – 1518 ई. (अनुमानित)
- जन्म स्थान: वाराणसी (लहरतारा)
- मुख्य रचना: बीजक (साखी, सबद, रमैनी)
"पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय,
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।"
2. गोस्वामी तुलसीदास (भक्तिकाल)
तुलसीदास सगुण भक्ति धारा के सर्वश्रेष्ठ कवि माने जाते हैं। उन्होंने 'रामचरितमानस' के माध्यम से रामकथा को घर-घर पहुँचाया।
- जीवन काल: 1532 – 1623 ई.
- प्रमुख रचनाएँ: रामचरितमानस, विनय पत्रिका, कवितावली
- विशेषता: अवधी भाषा पर उनकी अद्भुत पकड़ थी।
3. जयशंकर प्रसाद (छायावाद)
वे हिंदी साहित्य के 'छायावादी युग' के प्रमुख स्तंभ और महान नाटककार थे।
- जीवन काल: 1889 – 1937 ई.
- प्रमुख रचनाएँ: कामायनी (महाकाव्य), आँसू, लहर
4. सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'
निराला जी विद्रोही स्वभाव के कवि थे। उन्होंने हिंदी में छंद-मुक्त (Free Verse) कविता की शुरुआत की।
- जीवन काल: 1899 – 1961 ई.
- प्रमुख रचनाएँ: कुकुरमुत्ता, परिमल, राम की शक्ति पूजा
5. रामधारी सिंह 'दिनकर'
इन्हें 'राष्ट्रकवि' कहा जाता है। इनकी कविताओं में ओज और राष्ट्रीय चेतना कूट-कूट कर भरी थी।
- जीवन काल: 1908 – 1974 ई.
- प्रमुख रचनाएँ: रश्मिरथी, उर्वशी, कुरुक्षेत्र
"सिंहासन खाली करो कि जनता आती है।"